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कलियुग केवल नाम अधारा

नाम जप कलियुग में भक्ति का एक मुख्य अंग है । प्रभु के नाम जप की महिमा असीम है । संतों ने प्रभु नाम को “नाम भगवान” की संज्ञा दी है । हर युग में अपने साधन हुआ करते हैं । कलियुग में नाम जप और नाम कीर्तन ही प्रधान साधन है । सभी शास्त्र, संत और पंथ एकमत हैं कि कलियुग में नाम की ही प्रधानता है । संत कहते है कि “कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा” । सभी शास्त्रों में नाम की महिमा गाई हुई है । श्री रामचरितमानसजी की तो एक बहुत प्रसिद्ध चौपाई है “कलिजुग जोग न जग्य न ग्याना, एक अधार राम गुन गाना” ।

किनका नाम जप किया जाए:
जिन्होंने गुरु दीक्षा ली हुई है वे गुरु प्रदत्त नाम का जाप करें क्योंकि वही उनके लिए सर्वश्रेष्ठ है । वैसे नीचे दी गई नामावली में से किसी भी नाम का जो आपको प्रिय हो, उसका जाप कर सकते हैं ।
(1) श्रीराम (2) श्रीकृष्ण (3) श्रीहरि (4) श्रीनारायण (5) श्रीगोविंद (6) श्रीगोपाल (7) श्रीश्याम (8) हर हर महादेव (9) श्रीगणपति (10) जय हनुमान (11) श्रीराधा (12) माँ दुर्गा (13) माँ लक्ष्मी (14) माँ सरस्वती (15) हर हर गंगे (16) श्रीसीताराम (17) श्रीराधेश्याम (18) श्रीगौरीशंकर (19) श्रीलक्ष्मीनारायण (20) श्री सूर्यनारायण

नाम जप कलियुग में भक्ति का सबसे सरल और प्रभावी साधन है। प्रभु के नाम का स्मरण करने से मन को शांति, बुद्धि को स्थिरता और जीवन में सकारात्मकता प्राप्त होती है। सभी शास्त्र, संत और महापुरुष एकमत हैं कि कलियुग में केवल नाम ही मोक्ष का आधार है।

इस वेबसाइट पर आपको नाम जप की महिमा, नाम जप से जुड़े गहन विचार तथा नाम जप से संबंधित लेख सरल हिंदी में पढ़ने को मिलेंगे। यहाँ प्रस्तुत सामग्री आपको प्रभु से जोड़ने और जीवन को सही दिशा देने में सहायक होगी।

यदि आप भी मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और प्रभु कृपा की प्राप्ति चाहते हैं, तो नाम जप को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।